akhilesh Shrivastava 31 Mar 2026 कविताएँ समाजिक इंसान को कभी भी संकट के क्षणों में घबराना नहीं चाहिए 4210 0 Hindi :: हिंदी
*कविता* 18/3/26 *जीवन का संकट* जीवन में संकट हो फिर भी हमको हंसते रहना है। जीवन तो नाटक है प्यारे! हमें खेलते रहना है।। जब!जीवन में छाये अंधेरा हमको नहीं घबराना है शांत चित्त से समय काटकर जीवन ज्योति जलाना है।। संकट में नहीं रोना यारो धैर्य से सबको रहना है दुख का समय बीत जाने पर सुख का चांद निकलता है ।। आग में तपकर ही लोहा एक !सुंदर कृति बन पाता है दुख:के बादल छंट जाने पर सुख का उजाला आता है।। जीवन में जब आये निराशा हमको नहीं घबराना है नई सोच और नई ऊर्जा से हमें आगे कदम बढ़ाना है हंसते हंसते समय काटकर जीवन हमें बिताना है आया!संकट चला जायेगा सुख का!. द्वार सजाना है ।। रुचियां:--अखिलेश श्रीवास्तव एडवोकेट जबलपुर।।
I am Advocate at jabalpur Madhaya Pradesh. I am interested in sahity and culture and also writing k...