Kishor Kumar Bhardwaj 29 Oct 2025 कविताएँ प्यार-महोब्बत जब ‘मैं’ से ‘हम’ का योग हुआ 13261 0 Hindi :: हिंदी
#योग_हुआ वो दिन था जैसे सहर नई, मन में उजला संयोग हुआ। सदियों का तप थम गया वहीं — जब नयन मिला, योग हुआ। तेरी हँसी, मौन का कोई राग बनी, जो भीतर तक घुलती रही। हर तर्क में तेरा विरोध किया, पर प्रेम का संवाद हुआ। मैं ध्यान में था, एकांत में, स्वप्नों का संसार लिए — तेरी नज़र छू गई ज्यों, सभी तपों का भोग हुआ। कभी तेरा आग्रह, मेरा अस्वीकार, ऋतुओं का कोई खेल लगा। संयम टूटा, शब्द पिघले — मन बोला, पर जुबां निःशब्द रही। वो प्रेम था या साधना नई, कह नहीं सका कोई; क्षण भर की बातें, शांत लम्हे — पर युगों का संवाद हुआ। तेरे मौन ने कह दी हर बात, जीवन में फिर संयोग हुआ। और जब तू रूठी, ध्यान बिखर-सा गया — एक श्लोक टूटा, स्वर खो गया। अब मन कहता है नित मुझसे — ये प्रेम नहीं, साधना है कोई, जहाँ “मैं” डूबा तेरे रंग में — वहीं “हम” का सच्चा योग हुआ। ✍️के_भारद्वाज.