VIVEK KUMAR PANDEY 04 Sep 2025 कविताएँ प्यार-महोब्बत हर जन्म मे मुझको पाना तुम...., प्रेम 12365 0 Hindi :: हिंदी
मेरे सारे सपनों को, आकर सच कर जाना तुम। मेरी बाहों में आकर, झट से बस सो जाना तुम। अपने स्पर्श से मेरे मन की, प्यास को सदा जगाना तुम। हर जन्म मे मुझको पाना तुम।। आंसू तेरे आँखों मे अब, मुझे कभी स्वीकार नहीं। अपनी विकसित स्मित से, मुझे सदा बहलाना तुम। सूख जाए जब आंसू मेरे, लड़कर मुझे रुलाना तुम। हर जन्म मे मुझको पाना तुम।। मौसम बदले, ऋतुऐं बदले, पर तुमको नहीं बदलना है। मेरे आँगन में चिंडिया सी, मधुरम गीत सुनाना तुम। दूर गगन में उड़-उड़ कर, मुझको नहीं सताना तुम। हर जन्म मे मुझको पाना तुम।। हो जाये अगर उदास मेरा मन, ज़रा सा ना घबराना तुम। शक्कर सी मीठी बातों को, होठों पर रख लाना तुम। मेरे जीवन के सूखे पत्तों को, आँचल में समेट कर लाना तुम। हर जन्म मे मुझको पाना तुम।। मेरे सपनो का महल तोड़ कर, दूर कहीं न जाना तुम। कितना भी लड़ूं, रुलाऊं, बोलूं, पास मेरे ही आना तुम। अपने अटूट रिश्ते का सम्बल, आकर देकर जाना तुम। हर जन्म मे मुझको पाना तुम।। मै अविवेकी, बेबस, बेकल, तुमको क्या दे पाउँगा। अपने पावन स्नेह धारा से, मुझे सदा नहलाना तुम। डांट लगा कर मुझे जगा कर, अपने पास बुलाना तुम। हर जन्म मे मुझको पाना तुम।। मै अज्ञानी, तेरी बाते मुझे समझ नहीं आती है। मुझसे लड़कर अपना कह कर, हर बातें समझाना तुम। कितना भी मै तुमसे रूठूँ , प्रेम सुधा बरसाना तुम। हर जन्म मे मुझको पाना तुम।। विवेक कुमार पाण्डेय प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश