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हमारी दीवाली

akhilesh Shrivastava 02 Nov 2024 कविताएँ धार्मिक हमारे पुराने समय की दीवाली 29737 0 Hindi :: हिंदी

*हमारी दीवाली*

*कविता* 


ऐसे होती थी हमारी दीवाली 
घरों में चूना और छुई 
मिट्टी से पुताई होती थी 
घर के कपड़ों और पर्दों 
की धुलाई होती थी 

मां पुराने सामान की 
सफाई करती थीं 
सामान से छेड़छाड़ करने 
पर हमारी पिटाई होती थी 

घर के आंगन में गाय के 
गोबर से लिपाई होती थी 
गेरू और पीली मिट्टी से 
दीवारों में कला उकरती थी

केले और आम के पत्तों से 
घरों में वंदनवार बनाते थे 
दरवाजों पर चौक और रांगोली 
हर घर में बनाई जाती थी।

मां घर में तरह तरह-तरह के 
पकवान बनाती थी 
दीवाली पूजन तक हमें पकवानों
की महक ही मिल पाती थी

घर घर से फटाके चलाने 
की आवाज आती थी 
दोस्तों की टोली एक साथ 
मिलकर फटाके चलाती थी 
फुस्सी बम निकल जाने पर 
हंसी ठिठोली हो जाती थी।।

लक्ष्मी पूजन होने के बाद 
बड़ों का आशीर्वाद लिया जाता था 
फिर पास पड़ोस में प्रसाद 
बांटने की परंपरा निराली थी ।।

हमारे समय कम पैसों में भी 
बड़े उमंग और उत्साह से 
पड़ोसियों ,दोस्तों के साथ  
मिलजुल दीवाली मनाई जाती थी।

रचियता ---अखिलेश श्रीवास्तव एडवोकेट 
जय नगर जबलपुर

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