akhilesh Shrivastava 14 Mar 2026 कविताएँ समाजिक सन् 1920 से 1970 तक लगभग पचास वर्ष तक पूरे भारत में एक जैसी शिक्षा प्रणाली थी जो अत्यंत सुलभ सरल एवं यादगार थी 3973 0 Hindi :: हिंदी
*कविता* *हमारी पुरानी शिक्षा* अपनी प्रायमरी शिक्षा पर हमको बहुत अभिमान है बचपन में जो शिक्षा पाई आज भी उसका ज्ञान है प्रायमरी शिक्षा के हमारे सरंल और सहज नजारे थे बुद्धि, विवेक, ज्ञान संस्कार के पाठ बहुत निराले थे बड़े ही अच्छे प्यारे दिन थे जब हम स्कूल जाते थे हम बस्ते में स्लेट पेंसिल और किताब ले जाते थे सभी छात्र स्कूल में आकर पहले प्रार्थना करते थे राष्ट्रगान सरस्वती वंदना गाकर सब कक्षा में जाते थे बालभारती,और विज्ञान का गुरु जी पाठ पढ़ाते थे सामाजिक ज्ञान और गणित को ध्यान से हमें समझाते थे हिन्दी वर्णमाला मात्राओं का शुद्धलेख लिखवाते थे पहाड़ा और, जोड़ घटाना गुरु जी हमें सिखाते थे स्कूलों में महापुरुषों की जन्म और जयंती मनाते थे उनकी जीवनी सुनाकर गुरु जी उनका सम्मान कराते थे पी.टी खो- खो और कबड्डी स्कूल में हमें खिलवाते थे दौड़, कुश्ती ,नाटक, और भाषण का आयोजन करवाते थे अनुशासन तोड़ने पर गुरु जी मुर्गा हमें बनाते थे घुटना -टेक और उठ्ठक बैठक की सज़ा से हम घबड़ाते थे गृहकार्य न करने पर गुरु जी छड़ी से मार लगाते थे कक्षा के सब छात्रों के संग एक सा प्यार जताते थे हमारी पुरानी शिक्षा आज भी काम में आतीं हैं स्कूलों में बीते दिनों की हमको याद दिलाती है।। रचियता ---अखिलेश श्रीवास्तव एडवोकेट जयनगर जबलपुर
I am Advocate at jabalpur Madhaya Pradesh. I am interested in sahity and culture and also writing k...