Raj Ashok 24 Apr 2023 कविताएँ हास्य-व्यंग शहर 32804 0 Hindi :: हिंदी
कागज पर ,जैसे किसी ने ,
दिल से, कुँदेरा हो ।
वाह क्या ?,गजब
गजब के सुन्दर शहर है।
ये इस घरती पे
कुदरत ,क्या, हैरान है ?
शायद,
अपने इन जादुई ,
करिश्माई सौगात पर ,
यों तो है । ये एक विरासत
घरती के वासिन्दों की ,
पर अव , इने सम्भाले कोन ?
क्या ? यहा अब, वक्त की कमी है ।
अरे नहीं ,लोगों की आदते
अब बेजार हो गई है।
दिलों ,को , दिलों से
कच्चे घागे से रिश्तो मे,
जैसे बाँघ रखती धी।
आज वही क़ुदरत
खुद से शर्मशार है।
क्यों ,इन्सानो को उसने
यहा ,मालिक बनाया।
...... ?.......?