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एक अनजान नेह-बाँध रखता है सबको

संदीप कुमार सिंह 01 Jul 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 18971 0 Hindi :: हिंदी

कुंडलिया छंद
देता जो है ताजगी,सुन्दर रखता देह।
तेरे मेरे बीच में,एक अनजान
नेह।।
एक अनजान नेह,बाँध रखता है सबको।
धरा लगे तब स्वर्ग,कभी भूलें मत रबको।।
सबसे रखिए मेल,बनें विकास का नेता।
आगे बढ़े समाज,आशीष फिर जन देता।।
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार सिंह✍🏼
जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार

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