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दुश्मन की शामत आई थी

MD SHAYEED ALAM 10 Jan 2026 कविताएँ देश-प्रेम कविता मोहम्मद सईद आलम 7256 0 Hindi :: हिंदी

दुश्मन की शामत आई थी, 
जो पहलगाम पे वार किया।
निहत्थे लोगों का दुश्मन ने नरसंहार किया। 
बहनों का सिंदूर उजाड़ा,
सबका कत्लेआम किया।
भोले भाले लोगों पर गोली का बौछार किया। 
सिसक रहा था देश हमारा, 
सबको त्राहिमान किया। 
फिर भारत की सेना आई,
दुश्मन का संहार किया। 
उजड़ चुके मांगो की खातिर,
ऑपरेशन सिंदूर किया। 
दुश्मन को फिर से पीटा ,
उसको चकनाचूर किया।
पैंसठ,इकहत्तर की भांति ही ,
फिर से मटियामेट किया।
दुश्मन की टूटी कमर ,
अपनी हार स्वीकार किया।
भारत की सेना ने फिर से,
 दुश्मन को है पस्त किया। 
याद रखो उन वीरों को तुम,
 जिन्होंने अपना बलिदान दिया।
भारत मां की रक्षा में ,
अपने को कुर्बान किया।
सम्मान करो उन वीरों का तुम ,
जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर किया।।

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