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बापू की शेरनी

Mamta pannu 30 Dec 2025 कविताएँ अन्य बापू की शेरनी 7845 0 Hindi :: हिंदी

रानी का जौहर होता 
आत्म सम्मान के लिए 
शत्रु के आगे...
कभी समर्पण, 
कभी पर्दापण, 
उससे बचाव के रास्ते, कहाँ से लाएंगी
बेचारी ?
रोज़ रोज़ 
स्वर्णपिंजरे भीतर न चाहते हुए भी,मौत को गले कब तक लगाएगी 
बेचारी ?

इस लिए किसी राजा की रानी बनने से अच्छा है 
     ...बापू की शेरनी बनो ।
       विचरण करो  वहाँ
    शिकार की आहट, गंध आती हो जहाँ ।

 जो गीदड़, भेड़ियों के लिए बस एक मार,              
    न कोई  माफ़ी हो ।
  ऐसी खूंखार बनो 
जो किसी ने, न देखी
बस एक दहाड़ ही काफ़ी हो  ।

ममता पन्नू 

यह कविता पहले अमर उजाला काव्य पर प्रकाशित हो चुकी हैं ।

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