Rupesh Singh Lostom 30 Mar 2023 कविताएँ अन्य भेडीये सियार 37509 0 Hindi :: हिंदी
शासन आज जैचंद चलता और प्रशासन परेत कानून के रखबाले ही नरभक्क्षी बन गए . और प्रजा चाट पटा अहार . चट कारे ले खा रहे नेता जी इंसान. लोकसभा मे दानब भर गए और भेडीये सियार चिर हरण अब हर छान होता. और नही आता कोई कृसण. हर स्त्री पिडीत यहा और जुल्मी हुआ समाज