Jyotshna mishra 21 Feb 2024 कविताएँ धार्मिक 25144 0 Hindi :: हिंदी
कोयल पंचम स्वर सुनाए,
वंसतअपनी आहट लाए । सुखे प्रसूनों के झुरमुट में ,
नई राग नई ताल लिए । चूं-चू करके विहंगम गाए ,
बगीचा के हरियाली में ।
अभी-अभी छाई रुतबा ,
जैसे नव दुल्हनियां में ।
सलिल मीठा सरगम गए ,
झरने कल-कल स्वर्ण सुनाए ।
पहाड़ों कि ओटों में देखो ,
भानु स्वर्ण किरण फैलाए ।
शिशिर की सेना भंग होने को है,
बसंत का उमंग आने को है ।
वृंदावन में जागी बिहार ,
ग्वालिन सब गए मल्हार ।
फिर कहे मोहित बसंत ,
आओ तुम बार-बार ।