Rakshi 15 Feb 2025 कविताएँ बाल-साहित्य 16959 0 Hindi :: हिंदी
बचपन बड़ा मासूम सा है ये बचपन कही धूप कही छांव सा बचपन दुनियादारी से अनजान परियों की कहानी सा बचपन कागज पर आड़ी तिरछी रेखाओं सा सुनहरे किसी ख्वाब सा है बचपन नन्ही नन्ही प्यारी प्यारी यादों का गुलदस्ता सा अलबेला सा बचपन न किसी से बैर न किसी से अनबन हर फिक्र से अनजान सा बचपन बेफिक्री में यारों संग खेलता सा बचपन ठंडी में धूप और गर्मी में फुहार आ बचपन रुखसार परवीन