नितिश सरोज पाण्डेय 07 Feb 2025 कविताएँ प्यार-महोब्बत 26118 0 Hindi :: हिंदी
अवसाद के इन क्षणों में तुम्हारे संग बिताये हुए हर एक लम्हे की याद ठीक वैसी ही है जैसे घुटनों में फैले हुए दर्द पर कोई मरहम लगा रहा हो खुली हुई आँखों से तो तुम कहीं नजर नहीं आती पर आँखों को बंद करके जब भी मैं अपने अंतर्मन में झांकता हूँ तुम रेगिस्तान में प्यास बुझाने वाली ठंडे मीठे पानी की बावड़ी सी नजर आती हो