MD SHAYEED ALAM 28 Oct 2025 कविताएँ देश-प्रेम अगर मैं जवान ना होता 13692 0 Hindi :: हिंदी
कभी-कभी सोचता हूं एकांत में, मैं अगर जवान ना होता तो क्या होता? मैं भी बाबू बन बैठा होता किसी दफ्तर में, यू वीरान सुनसान जगहो में परेशान ना होता। मैं भी आगे बढ़ता जग में, मेरा टूटा मकान भी आज आलीशान होता । कभी-कभी सोचता हूं एकांत में, मैं अगर जवान ना होता तो क्या होता? मैं भी मां की सेवा करता, उसके बीमारी परेशानियों से यूं अनजान ना होता। बहना संग मिलकर मनाता रक्षाबंधन, मेरे जीवन में भी नहीं होता कोई बंधन। बीवी संग मैं घूमा करता, बच्चों संग मैं खेला करता। बाबा जब भी खेत पर जाते , मैं भी उनका हाथ बंटाता। फिर कभी सोचता हूं, मैं अगर जवान ना होता तो मेरा यूं सम्मान ना होता, मेरा पक्का ईमान न होता, मैं सिर्फ हिंदू या मुसलमान होता, मैं एक बेहतर इंसान ना होता, मैं अगर जवान ना होता, तो बेशक मैं धनवान होता। पर मुझे अपनी वर्दी पर यूं अभिमान ना होता।।