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अधरों की मुसकान पर-दिल होता कुर्बान

संदीप कुमार सिंह 13 Jul 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 31268 0 Hindi :: हिंदी

(दोहा छंद)
अधरों की मुस्कान पर, दिल होता कुर्बान।
उसको अपना जान कर, बना लिया हूं जान।।
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार सिंह✍🏼
जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार

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