संदीप कुमार सिंह 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक मेरी इस कविता को पढ़कर पाठक गण अवश्य ही लाभान्वित होंगें। 25445 0 Hindi :: हिंदी
अधर्म पावक में सभी, झुलस रहा संसार । ईर्ष्या करते हैं सभी, बातों में तकरार।। झूठ अग्नि का है कहर, झुलस रहा संसार। धोखा देते हैं सभी, रहा नहीं अब प्यार।। झुलस रहा संसार अब, फैल रही है पाप। रोग बला अब है बनी, सबको है संताप।। झुलस रहा संसार में, अभी अधिकतर लोग। सभी दुष्कर्म में लगे, करते रहते भोग।। झुलस रहा संसार के, प्राणी सारे आज। बने मतलबी हैं सभी, स्वार्थ का सिर्फ राज।। संदीप कुमार सिंह ✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....