Anilkumar Rathwa (Sameer) 01 Jan 2026 कविताएँ अन्य “अभी टूटना मना है” 12093 1 5 Hindi :: हिंदी
जब साँसें भी बोझ लगें, और हर कदम सज़ा लगें, तब समझ लेना— तू वहीं खड़ा है जहाँ से इतिहास बनता है। मंज़िल थकती नहीं, थकता सिर्फ़ हौसला है। और जो हौसले को ज़िंदा जला देता है, वही आग बनकर निकलता है। गिरना कमजोरी नहीं, पड़े रहना अपराध है। डर को पालना ग़ुलामी है, और रुक जाना—खुद से गद्दारी। चलता रह, चाहे लहू बहे, क्योंकि जो आख़िरी तक चलता है, वक़्त भी एक दिन उसी के क़दमों में चलता है। अभी टूटना मना है, अभी रुकना मना है— क्योंकि जीत सिर्फ़ ज़िद्दी लोगों की आदत होती है।
4 months ago