Raj Ashok 29 Jun 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत कबूतर बाज 31080 0 Hindi :: हिंदी
दिल,पे दोस्तों, अब ,लिखा दे क्या ? हम भी कोई , एक नाम...... ! के ,ज़िन्दगी की, ढ़लती हुई । हसीन शाम मे दस्तूर की वो शमाँ जलाए पायल की छन-छन से । अगर ... मौसम , अपना ही अन्दाज़ बदल जाऐ। तो , आशिकी का अपना ,शौक जाया न होगा मगर..... पहले खुशनसीब, हो हम,इतने तब दिल लगाऐ । दोस्त ..... . वरना, कबूतर बाजी का दौर है । हकिकत कम ,यहाँ बेतुका शौर है । दिल्लगी ,के मैदान मे रहने लगे । अब सब चोर है। शराफत की यहाँ अब कोई हद नहीं । एक चहरे की खुबसुरत तस्वीर बनी है। बेजार ,दिल मे अब भी ,मुहोबत की सच्चाई पे ये मेरा दिल मौन है ? बता दोस्त , चाहत को सच मानो, या दुनिया की हकिकत को