मनोज कुमार 30 Jun 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत #गम #दिल के दर्द #इश्क #जुदाई 34838 1 5 Hindi :: हिंदी
आँसुओं के पत्ते सब मुरझा गए हैं मेरे आँसुओं के पत्ते न हैं वो यार मेरे न पास कोई दिल इंसान हूँ पत्थर भी तो नहीं, जाँ हैं मेरे सीने के अन्दर तो झाँक खुदा मेरे महबूब आँचल के डोर दांत से, कुतरती हुईं गुनगुनाती है तू सुन.. वो एक इक राग मेरे लिए बिखेरती है कितनी नजदीकियाँ है मेरे पास, उसकी आने की खबर सुनाई देती हैं वो हँसती भी है कभी तो ऐसा लगता है कि वो हरपल मेरे लिए रोती है.. मेरा दिल उसी के खयाल में ऐसे पिघला है जैसे नल के चौक पर पड़ी साबुन की बट्टी ऐसे ही झोंके मौके पर आते हैं जब दर्द उठता है इश्क के मर्ज में ख़ामोश हो जाती है धड़कने ये.. क्या करें खयाल में कई इंतजार, ढूँढ रही हैं, पास आने का बहार ढूँढ रही हैं मगर क्या करें दिलकशी भी दूर हैं जो पास आने में मजबूर हैं, लेकिन.. रोग तो फैल गया है, जिन्दगी के शजर में अब पत्ते क्या शजर भी मुझाए तो क्या... उम्मीदें तो राख होने ना देगें, गैर दर्द को कभी उसके पास सोने ना देगें - मनोज कुमार गोण्डा उत्तर प्रदेश
2 years ago