Raj Ashok 03 Dec 2024 कविताएँ हास्य-व्यंग इन्तज़ार 23104 0 Hindi :: हिंदी
आज से, इन्तज़ार नहीं करना।। उस , लम्हे का जो मिठास दें मुझे पास तेरे होने का अहसास दे।। चल , छोड़ दिया ।। तुझे इस हंसी दुनिया के भरोसे अब खुशियों की एक सुर्ख़ी तुझे मिठी लगें, शहद सी ।। कीमत जाने तों मुहोबत की बेकार यों क्यों उलझना जीवन के झगड़ों में तेरी शक्शीयत मेरा अब सहारा नहीं जो मेरे वजुद पे जब चोट लगें साथी अपने आप बदल जाते हैं ।। सफ़र में ये जिंदगी है ।। यहां माईने है। क्या तेरे मेरे सोचें चलके अलग-अलग रास्तों पे । कभी मिलों अनजाने रास्तों पे तों मुस्करा देना।। वरना....!! तुम -हम कौन