संदीप कुमार सिंह 09 Jul 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी रोमांचित होंगें। 39967 0 Hindi :: हिंदी
(मुक्तक छंद) आईने की तुझे जरुरत नहीं तुम खुद एक आइना हो। शीशे जैसा चमकता तेरा बदन तुम एक मृदु हसीना हो। देखने के बाद लोग खुदबखुद चार्ज होने लगता है_ कुदरत के खजाने का तुम अदभुत अनमोल नगीना हो। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....