आयुष शर्मा "शास्त्री" 30 Mar 2023 कविताएँ अन्य सीयासती रंग 83473 0 Hindi :: हिंदी
नश्वर है जब तेरी काया
बंधन में मन क्यों लगाया
पाई- पाई धन जो तूने जोड़ा
संग अपने क्यों ना ले पाया
समझा जिसको तूने अपना
चिता पर उन्होंने तुझे सुलाया
स्वयं का भला जो तूने सोचा
वो स्वार्थ तेरे आज काम ना आया
जिस तन पर अकड़ा हरदम तू
औरों ने आज उसे उठाया
बैठा गोद तूने जिसे खिलाया
उसने आज तुझे जलाया
कवि - आयुष शर्मा "शास्त्री"