Rupesh Singh Lostom 30 Mar 2023 कविताएँ अन्य आज भी 88559 0 Hindi :: हिंदी
फूल और खिलता आज भी कलियाँ भी खिल खिलाती भवरें गीत सुनाते आज भी कोयलिया भी गुनगुनाती बगियाँ मुस्कुराती आज भी अगर हवा का झोका न आता बागवा और बाग लगता आज भी गुलशन महकते भिन भिन के खुशबू और बिखेरतें आज भी तितलियाँ रंग बिरंगी उड़ती आज भी पक्षियों की कलबलाहट पौधों के गुमलाहट तीतर के तिलमिलाहट अगर बागवा बाग न उजड़ता तो बगियाँ खूब इठलाती आज भी