Sweta Kumari 02 Jun 2024 कहानियाँ समाजिक श्रेय 34890 0 Hindi :: हिंदी
अगस्त 1992 का हर दिन एक इंतज़ार था। दसवी बोर्ड का रिजल्ट जो आनेवाला था।बिहार बोर्ड की दसवी परीक्षा पास करना,जिसे मैट्रिक की परीक्षा कहा जाता था,एक बहुत बड़ी उपलब्धि हुआ करती थी। जिसने एक बार मे यह परीक्षा पास कर ली उसने तो मानो बहुत बडी जंग जीत ली। मेरी परीक्षा जो फरवरी मे होनेवाली थी,शिक्षको के हड़ताल एवं अन्य कारणो से मई मे हुई। मैने दो साल पहले से ही सार्वजनिक जीवन से दूरी बना ली थी। पहले मैट्रिक की परीक्षा दो वर्षो के सिलेबस पर आधारित होती थी -नवमी एवं दसवी।इस कारण परीक्षा काफी कठिन होती थी। मेरे मात-पिता "अतिथि देवो भवः" की मान्यता पर जीते थे।इस कारण मेरे घर लोगो का आना-जाना लगा रहता था। घर मे पढ़ाई का माहौल बहुत अच्छा नही था।इन सबके बावजूद मेरी बहने और मेरे बड़े भाई ये चाहते थे कि मेरा रिजल्ट अच्छा हो।इसलिए वे मेरे सहयोगी बने। घर मे कोई आता तो मुझे चुपचाप दूसरे घर या छत पर पढ़ाई करने भेज दिया जाता।मै अतिथि को प्रणाम कर हट जाती ।मेरे भैथा का ध्यान इस बात पर था कि कौन-सी नई पुस्तक या गेसपेपर निकला है ,वह मुझे उपलब्ध कराते। मै खुश थी कि फरवरी-मार्च तक मेरी परीक्षा समाप्त हो जायेगी और उसके बाद मै बहुत सारी शादियो मे जाऊँगी। मेरे मामा और मौसी की शादी थी तो मुझे गांव जाना था।मै अपने नानी घर दस साल से नही गई थी।किंतु परीक्षा की तिथि बढती गई और दोनो की तिथि मिल गई। शादी मे सभी को जाना था । किंतु मेरी परीक्षा के कारण मेरी दीदी और भैया नही गए। मेरी दीदी खाना बनाती और मेरी सारी सुविधाओ का ख्याल रखती।भैया मुझे सेंटर पहुँचाते,फिर ब्रेक मे आते और फिर मुझे लेने आते। परीक्षा तीन-तीन घंटे की दो पाली मे थी।लगभग 15 दिनो तक ब्रेक लेकर परीक्षा समाप्त हुई और सारे शादी -विवाह भी।इस साल भी मै किसी शादी मे नही जा सकी और ना ही दीदी और भैया। समय बीतता गया और रिजल्ट का दिन आ गया।सुबह 4बजे से ही मै उठकर बैठ गई। 5 बजे से ही भैया को उठा रही थी कि वो जल्दी से पेपर लेकर आये। पहले रिजल्ट पेपर मे ही आता था।भैया तैयार होकर पेपर लाने गए। मै बालकनी मे चहल कदमी कर रही थी।तभी भैया और उनके दोस्त गुडडु भैया पेपर लेकर आये। गुड्डू भैया ढेर सारी चाकलेट भी लेकर आए थे।मैने कहा-आप लोग रिजल्ट कैसे देखे एडमिट काड॔ तो मेरे पास है। वो बोले देख लो तुम फस्ट डिवीजन आई होगी।भैया जल्दी जल्दी मेरे एडमिट काड॔ से रौल नम्बर मिलाए और सच मे मै फस्ट डिवीजन से पास हुई थी। मेरा रिजल्ट सुनकर मम्मी-पापा,भाई-बहन,अडोसी-पडोसी सभी बहुत खुश थे। मेरे घर मे पहली बार कोई मैट्रिक मे फस्ट डिवीजन से पास किया था। सभी मुझे शुभकामना दे रहे धे और मै सोच रही थी कि इस उपलब्धि का श्रेय किसे दिया जाए-भैया ,दीदी या मुझे।