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{श्रद्धा बड़ी या भगवान}

अमित बंसल 24 Oct 2025 कहानियाँ धार्मिक ' जीवन एक उत्सव: 12000 0 Hindi :: हिंदी

******श्रद्धा बड़ी है या भगवान******
राज सभा लग चुकी थी। सभी मंत्रियों ने अपना अपना स्थान ग्रहण कर लिया था। कुछ ही समय बाद राजा टोडरमल भी हाज़िर हो गए । क्रमानुसार राज्य सभा की कार्रवाई पुरी हो गई ।
राजा टोडरमल बहुत ही धार्मिक प्रवृत्ति के इन्सान थे। इसलिए सभा के अंत में , अपने मंत्रियों से कोई ना कोई धार्मिक सवाल पुछते थे । आज भी उन्होंने अपने मंत्रियों से एक सवाल पुछा।
*****श्रद्धा बड़ी है या भगवान*****
लगभग सभी मंत्रियों ने भगवान को बड़ा बताया। राजा सन्तुष्ट नहीं थे । उन्होंने सबसे पीछे बैठे मंत्री बुद्धदेव से कहा । बुद्धदेव ! पहले तो यह बताओं कि तुम सबसे पीछे क्यों बैठते हो ?
महाराज आगे बैठने से , मंत्रियों की बात सुनने के लिए बार बार मुड़ मुड़ कर गर्दन को तकलीफ़ देनी पड़ती है। मगर पीछे बैठने से सीधा सीधा दिखाई और सुनाई दे जाता है । कुछ मजाकिया माहौल के बाद, राजा ने बुद्धदेव से पुछा। बुद्धदेव ! तुम बताओ
* ****** श्रद्धा बड़ी है या भगवान*******
बुद्धदेव ने तुरंत जवाब दिया । महाराज श्रद्धा बड़ी होती है। सभी मंत्री जोर जोर से हंसने लगे । परंतु राजा चुप थे । उन्होंने बुद्धदेव से कहा, क्या तुम यह साबित कर सकते हो।
जी महाराज ! इसके लिए मुझे तीन महीने का वक्त चाहिए। और इन तीन महीनों में मैं राज सभा भी नहीं आऊंगा।
कुछ सोच विचार करने के बाद राजा ने इजाजत दे दी।
जाते जाते बुद्धदेव ने कहा, महाराज! तीन महीने तक आपसे दूर रहना मुश्किल है इसलिए आपके ये जूते दे दिजिए। सुबह सुबह इनके दर्शन कर लिया करुंगा। महाराज ने उनकी विनंती सहर्ष स्वीकार कर ली। बुद्धदेव जूते लेकर अपने घर की तरफ़ चल पड़ा।
अगले दिन सुबह सुबह ही बुद्धदेव , किसी को बताए वगैर ही घर से बाहर चला गया । शहर के बाहर एक तालाब के किनारे, एक छोटा सा चबूतरा बनाया और उसकी पूजा करने लगा। कुछ लोगो ने महामंत्री जी को पूजा करते हुए देखा और उनसे पुछने लगे । महोदय ! आप यह किसकी पूजा कर रहे हैं।
मंत्री ने जवाब दिया कि कल रात मुझे सपने में भगवान दिखाई दिए थे । भगवान ने कहा कि तालाब के किनारे मेरा निवास है। तुम हररोज वहां मेरी पूजा करना । उन्होंने अपना नाम चरणेश्वर भगवान बताया और कहा कि जो भी व्यक्ति मेरी पूजा करेगा उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होगी। इतना कहने बाद मंत्री जी ने पूजा आरंभ कर दी। आगंतुक भी हाथ जोड़कर बैठ गए।
धीरे धीरे यह बात सारे शहर में फ़ैल गई और हररोज चरणेश्वर भगवान के चबूतरे पर भीड़ जमा होने लगी। लोग तरह तरह की मनोकामनाएं मांगने लगे। किसी की पुरी हो जाती थी तो वह चरणेश्वर भगवान का परम भक्त हो जाता था। बड़े बड़े सेठ भी वहां आने लगे थे। उन्हें वह छोटा सा चबूतरा अच्छा नहीं लगा और वहां एक भव्य मंदिर बनवाने का निर्णय लिया गया।
बुद्धदेव से पुछा गया तो बुद्धदेव ने कहा .... आप मंदिर बनवा सकते हैं। मगर चबूतरे को कोई नूकसान नहीं होना चाहिए। कुछ ही दिनों में वहां भव्य मंदिर बनकर तैयार हो गया। चरणेश्वर भगवान की ख्याति चारों तरफ़ फ़ैल चुकी थी। दुर दुर से दर्शानार्थी आने लगे थे ।
चरणेश्वर भगवान की ख्याति एवं उनके चमत्कार की बात राजा टोडरमल तक भी पहुंच गईं और उन्होंने भगवान के दर्शन करने का दिन निश्चित कर लिया।
राजा जिस दिन दर्शन करने वाले थे, उस दिन सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए और आम जनता के लिए दर्शन बन्द कर दिए गए।
बुद्धदेव ने राजा से कहा ..... महाराज आप और मैं ही गर्भगृह में प्रवेश करेंगे। और किसी का साथ में रहना उचित नहीं है। राजा ने बुद्धदेव की सलाह को सहर्ष स्वीकार कर लिया।
निश्चित दिन राजा और बुद्धदेव ने मंदिर के लिए प्रस्थान किया और मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर लिया। राजा ने बड़े श्रद्धा भाव से पूजा अर्चना की परंतु जब चबूतरे के दर्शन की बारी आई तो बुद्धदेव ने सभी पुजारियों को बाहर कर दिया। राजा ने चबूतरे को दंडवत प्रणाम किया और चबूतरे पर मस्तक रखने ही वाले थे तो बुद्धदेव ने तुरंत रोक दिया। राजा कुछ समझ पाते उससे पहले ही बुद्धदेव ने कहा...... महाराज मैंने सिद्ध कर दिया है कि भगवान से बड़ी श्रद्धा होती है। आप जिस चबूतरे पर सिर रखने जा रहे थे उसमें आपके वहीं जूते रखें है जो मैं ढ़ाई महीने पहले आपसे लाया था। आप अपने ही जूतों पर मस्तक रखते यह मुझे मंजूर नहीं था। ढ़ाई महीने से मैंने और आपकी जनता ने उन्हीं जूतों की पूजा की है ।मेरी आपसे प्रार्थना है कि आप जनता की इस अटूट श्रद्धा को मत तोड़ना ।
दोस्तों ! 90% मंदिर श्रद्धा के बलबूते पर निर्भर है। मेरे शहर में एक मंदिर है***रोकड़िया हनुमान*****
सबसे पहले यहां एक पत्थर सिंदुर लगा कर रखा गया था। और पुजारी कहता था " रोकड़ा दो , रोकड़ा पाओगे" कुछ ही दिनों में वहां मंदिर बन गया । नाम है ***रोकड़िया हनुमान****
आजभीश्रद्धा वान भक्तों की वहां भीड़ लगती है ।
मेरे शहर में एक मंदिर और भी है
*******दंगाई हनुमान*******
मंदिरों के नामों पर मत जाइए। बस एक ही मंत्र याद रखिए ।
***†***श्रद्धा है तो, भगवान है।*******
ॐ नमः शिवाय
अमित बंसल उर्फ अमित अस्तित्व
9825123093
*जीवन एक उत्सव*

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