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जसू

Aarti Goswami 10 Aug 2024 कहानियाँ अन्य जसू कहानी, आरती गोस्वामी की कहानी, जसू 45828 1 5 Hindi :: हिंदी

"जसू"

यह कहानी हैं हमारे घर की सबसे प्यारी सदस्य जसू की। वैसे मैं बता दूं जसू हमारी गाय की बछड़ी हैं।
फरवरी माह में हमारी गाय ने एक बछड़ी को जन्म दिया उससे पहले हमारे घर में कोई गाय का बच्चा नहीं था। तो इस बछड़ी को लेकर घर में उसी तरह की खुशी का माहौल था जैसा किसी घर में किसी बच्चे के जन्म पर होता हैं।
              जब मुझे पता चला गाय का गर्भकाल चल रहा हैं यह जानकर तो जैसे मेरे मन में खुशी के लड्डू फूटने लगे ओर तभी मैंने सोच लिया अगर गाय के बछड़ी हुईं तो उसका नाम जसू ही रखेंगे। क्योंकि इस नाम के साथ हम सभी घरवालों को बहुत लगाव हैं।
       जिस गाय के ये बछड़ी हुईं उसकी मां का नाम जसू था वो दिखने में सुंदर, प्यारी और मासूम थी।लेकिन ढलती उम्र के साथ उसके जीवन का अंतिम समय आ जाने से वो भगवान के घर चली गईं। वो तो चली गईं पर वो अपनी एक बेटी हमे दे गई ओर साथ ही अपना प्यारा सा नाम जसू।
                                 जसू के जाने के बाद उसके बेटी हमारे घर में एकमात्र गाय थी। जिसका शायद हमने कभी नाम भी नहीं रखा था क्योंकि पहले वो अपनी मां के साथ ही रहती थी तो हम जसू को आवाज लगाते और दोनों ही आ जाती थी। इसलिए उसके नाम की शायद हमे कभी अनिवार्यता महसूस ही नहीं हुईं।                          
      लेकिन जब इसके बच्चा हुआ तो मेरे मन में खुशी के लड्डू फूटने लगे मुझसे और इंतजार नहीं हो रहा था तो मैने जल्दी से दादाजी से पूछा बछड़ा हैं या बछड़ी दादाजी ने कहा बछड़ी हैं ये सुनकर मेरी खुशी तो जैसे सातवे आसमान पर पहुंच गई। क्योंकि मैंने सोच रखा था बछड़ी हुईं तो नाम जसू ही रखेंगे।
                          अब ये बछड़ी ग्यारस  के दिन हुईं थीं तो दादाजी ने कहा ग्यारसी नाम रख देते हैं मैने कहा नहीं नाम तो जसू ही रखेंगे। संयोग से वह दिखने में भी बिलकुल जसू जैसी ही हैं वही लचीले पैर, सफेद रंग, माथे व पीठ पर गेरुआ रंग, मोती के जैसी चमकीली आंखे ओर उसकी आंखों को देख ऐसा लगता हैं जैसे भगवान ने काजल लगा कर भेजा हों।
उसकी सुंदरता को देख मन में जैसे ठान लिया था नाम तो इसका जसू ही होगा। 
                             अब एक समस्या ये थी की इस नाम को सभी घरवालों की स्वीकृति कैसे दिलवाऊं क्योंकि उनके लिए तो जसू वही थी जो अब भगवान को प्यारी  हो गईं। इस समय मेरी एक ही साथी थी ये वो हैं जो सभी घरवालों के दिलों पर राज करती हैं जिसकी हर बात को आदेश समझा जाता हैं जिसे हमारे घर की राजकुमारी माना जाता हैं उसका नाम हैं आराध्या। तो मैंने आराध्या के द्वारा इस नाम को सभी घरवालों तक पहुंचा दिया ओर ये मेरी खुशनसीबी हैं की सभी घरवालों ने इस नाम को बड़े प्यार से अपना लिया।
       अब ये नन्ही जसू हमारे घर में एक खिलौने के जैसे हो गईं। कोई उससे बाते करते तो कोई उसे अपने आगे पिछे दौड़ाते जसू के साथ खेलने में जो सबसे आकर्षक हैं वो हैं उसकी छलांग और उनकी दौड़ने की रफ्तार। 
       उसकी छलांग और दौड़ने की रफ्तार को देख के ऐसा लगता हैं अगर गायों का ओलंपिक हो रहा होता तो लम्बी कूद या तेज धावक का अवार्ड तो ले ही आती।
 देखते ही देखते जसू घर में सबकी चहिती हो गई। ओर मेरा भाई नरेश वो तो बचपन से ही हमारे घर का कन्हैया रहा हैं उसे बछड़े बछड़ियो से कुछ ज्यादा ही लगाव हैं। इसी कारण जसू के पास सबसे ज्यादा वही दिखता हैं ओर जसू का सारा काम भी वो खुशी खुशी कर देता हैं। जसू का सभी घरवालों के साथ एक अटूट सा रिश्ता जुड़ गया हैं। अब अगर थोड़ी देर भी जसू को घर में कोई ना दिखे तो वह बा बा की आवाज़ करने लग जाती हैं जैसे की वो हमे बुला रही हो। जसू को देख कर ऐसा लगता हैं जैसे वो हमारी बातों को सुन ओर समझ रही हैं। 
कभी कभी अगर जसू की आंखो में आसू आ जाते तो कृष्णा उसके पास जाकर कहती हैं जसू वाई आर यू क्राइंग अगर जसू बोल सकती तो कृष्णा उसे अंग्रेजी जरूर सिखा देती क्योंकि कृष्णा हमारे घर की सबसे होनहार सदस्य हैं। 
                     जसू का ध्यान तो घर में सब रखते हैं पर मेरे दादा-दादी उसकी कुछ ज्यादा ही परवाह करते हैं। इसलिए दादी उसे साफ पानी, मीठा दलिया, सिंपल दलिया, चारा आदि कुछ न कुछ खिलाती रहती हैं।
तो दादाजी सर्दियों उसे ठंड से बचाने के उपाय करते तो गर्मियों में गर्मी से राहत के लिए पंखे की हवा में रखते हैं। इसी तरह समय के साथ जसू ने घर में अपना एक प्रमुख स्थान लिया। अब तो ऐसा हैं की अगर जसू ना हो तो घर सुना लगता हैं 
घर का यहीं माहौल देख कर दिल से एक आवाज़ आती हैं ये हैं मेरा गोपालक देश जहां गायों को सिर्फ माता के रूप में पूजा ही नहीं जाता बल्कि उन्हें अपने घर का सदस्य माना जाता हैं। और ये तो एक जसू की कहानी हैं अगर सभी लोग जानवरो से प्रेम करने लग जाए तो ऐसी जसू ओर उसकी कहानी हर घर में मिलेंगी।
   ~'आरती गोस्वामी'✍️

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1 year ago

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