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प्रवचन

Aniket 30 Mar 2023 कहानियाँ हास्य-व्यंग # Aadarsh Shiksha Institute #Delhi Aadarsh Nagar 50482 0 Hindi :: हिंदी

एक महापुरुष थे, वे बहुत ज्ञानी थे। लोग उनके किस्से दोहराया करते थे और आपस मे उनहीँ के चर्चे भी किया करते थे। एक बार गांव में एक सभा का आयोजन होने वाला था।

लोगों ने इस बार महापुरुष से आग्रह किया कि वे उनकी सिबह में आए और लोगों को अपने वचन सुनाकर अनुग्रहित करें। महापुरुष मान गए और उनकी सभा मे आने के लिए तैयार ही गए।

   अब सभा का दिन आ गया। सभा मे सभी जन बहुत ही उत्सुक थे महापुरुष के विचार सुनने के लिए। तब महापुरुष मंच पर आए। उन्होंने लोगो का अभिवादन किया और एक प्रश्न पूछा,

” क्या आप जानते हैं कि मैं आज आप को क्या बताने वाला हूं?”

  तब सभी लोगों ने सर हिलाकर जवाब दिया, “नहीं”।

इस बात पर महापुरुष को बहुत ही क्रोध आया और महापुरुष बोले,” जब किसी को मेरे विचारों का कोई आदर ही नहीं है तो मैं अपना समय व्यर्थ क्यों करूँ? मैं जा रहा हूँ।” महापुरुष चले गए।

   वहाँ पर उपस्थित लोगों को भी स्वयं पर ग्लानि हुई कि उन्हें महापुरुष के विचारों के बारे में कुछ नहीं पता।

अगले दिन फिर सभा का आयोजन किया गया औऱ महापुरुष को बुलाया गया। इस बार भी उन्होंने वही प्रश्न किया, “क्या आपको पता है कि मैं आज आपको क्या बताने वाला हूं?”

  इस बार लोगों ने हां कहा। तब महापुरुष बोले, ठीक है जब आप सभी को पता ही है तो मैं अब बाकी क्या बताऊँ। और वे वहां से चले गए।

     अगले दिन फिर सभा का आयोजन हुआ महापुरुष को बुलाया गया। इस बार महापुरुष के उस ही प्रश्न पर आधे लोगों का जवाब हाँ था और आधो का न। तो इस पर महापुरुष बोले,

जिन आधो को पता है वे अन्य आधो को बता दो!

सभी को बहुत क्रोध आया और आगे से कभी उन महापुरुष का नाम भी गांव में नहीं लिया गया।

सीख | कभी भी सोच विचार कर ही अपनी बातों को दूसरों के सामने रखना चाहिए।


लेखिका : वीना शर्मा By : आदर्श शिक्षा इंस्टीट्यूट

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      धन्यवाद 

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