नखरे हजार... - Rakhi sharan

नखरे हजार...     Rakhi sharan     शायरी     समाजिक     2021-09-22 11:33:19     नजरें सामने होकर के वो नहीं देख पाती जो हम देखना चाहते हैं।     6555        
नखरे हजार...

कभी नखरे हजार करके भी
वो जिद पुरी नहीं हो पाती जो हम  पूरे करना चाहते हैं,
कभी नजरे सामने होकर के भी,
वो नहीं देख पाती जो हम देखना चाहते है।

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