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झरनों की धारा बह रही है- पत्थरों को छू कर गुज़रती है

Shivani singh 07 Jul 2023 गीत अन्य 33930 0 Hindi :: हिंदी

झरनों की धारा बह रही है,
गहरी गुफाओं से निकल रही है।
ऊँचाइयों से छलकती है वो,
हमें आकर बहोता रही है।

पत्थरों को छू कर गुज़रती है,
प्रकृति की सुंदरता बख़्शती है।
स्वच्छता और शांति का प्रतीक है,
झरने की धारा हमें भाती है।

झरने की लहरों में खो जाओ,
मन की शांति को पाओ।
वो प्राकृतिक शोभा और प्रसन्नता,
झरने के नज़ारों में समाती है।

झरनों की सुगंध ले आए,
खुशबूओं से मन को भर जाए।
उन गिरते पानी की मिठास और चमक,
हमें ख़ुशी और उमंग देता है।

झरने के चलते पानी की धारा,
बिना रुके निरंतर बहाती है।
वो लहरों का खेल, उच्छाटन और गान,
हमारे मन को मोह लेती है।

झरनों के मनमोहक नज़ारे,
हमें नयी ऊर्जा देते हैं।
हमें प्रकृति की गोद में भर जाते हैं,
झरनों की धारा हमें ले जाते हैं।

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