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श्रम साधक का बहे पसीना

संदीप कुमार सिंह 31 May 2026 कविताएँ समाजिक Meri Kavita Samaj Hit Me Hai.Pathak Log Se Aagrah Hai Ki Meri Is Rachna Ko Padh Kr Labh Uthayen. 3137 0 Hindi :: हिंदी

श्रम  साधक  का  बहे  पसीना
श्रम  साधक  का  बहे  पसीना,नित्य  जलाता  खून l
सेठ  लोग  सुख   को पाता है,पाता  बड़ा  सुकून l
पर  श्रम  साधक  तो  दुख  झेले,कर  के  मेहनत  खूब=
श्रम  साधक  को  आगे  लाना, पालो यही  जुनून ll
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार सिंह*Author*

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