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शेर
रास्ते अच्छे नही लगते सफर अच्छा नहीं लगता तुम्हारे बिन न जाने क्यो ये घर अच्छा नहीं लगता ज़माने की सारी नेमते मौजूद हो लेकिन अगर बेट�
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शेर
उजडे हुऐ चमन की पहचान हो गये हम एक खुशनुमा चेहरे की मुस्कान हो गये हम हम हो गये मेहमान किसी खुशनुमा जिगर के जब से मिली निगाहें कुर्वान
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जैसी करनी वैसी भरनी
किसी को रुला कर भला कैसे खुश रह पाओगे हकीकत यही है जैसा बोओगे वैसा ही पाओगे
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अपने दिल में पनहा दी हमने
अपने दिल में पनहा दी हमने, अपनी सांसों में वसा लिया हमने, अपनी आंखों में छिपा लिया हमने।
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अश्क छुपाए बैठे हैं
एक मुक्तक अपने ही हाथों से अपना, जिगर जलाए बैठे हैं । खुशबू की चाहत में गुल से, धोखा खाए बैठे हैं । देख रहे हो जिन आँखों में,सपनों की त�
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दिल के घर में तुझ को बिठाकर
दिल के घर में तुझ को बिठाकर, पलकों के दरवाजे में बंद कर लेंगे, आंखों में काजल की तरह समा लेंगे।
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दिल के घर में तुझ को बिठाकर
दिल के घर में तुझ को बिठाकर, पलकों के दरवाजे में बंद कर लेंगे, आंखों में काजल की तरह समा लेंगे।
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प्यासा ही पानी की कीमत समझता है
प्यासा ही पानी कीमत समझता है, भूखा ही भोजन कीमत समझता है, जिसे लगती है चोट उसे ही दर्द होता है,जिसका कोई खो जाता है,उसकी तकलीफ वो ही समझत�
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हमने की थी दोस्ती तुम से
हमने की थी दोस्ती तुमसे, थोड़ा गम हमारा कम हो जाए, ग़म क्या कम होता, हमें अंधेरे कुएं में छोड़ आये।
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ना समझा दर्द मेरा
किसी ने ना समझा दर्द मेरा, और चोट करके चला गया, समझा था हमको लोहा, हथौड़ा मारकर चला गया।
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ना समझा दर्द मेरा
किसी ने ना समझा दर्द मेरा, और चोट करके चला गया, समझा था हमको लोहा, हथौड़ा मारकर चला गया।
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वतन से इश्क
ना जाने लोग क्यूं शराब पीते हैं, वतन से इश्क करने का नशा क्या कम होता है........
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