मोती लाल साहु 24 May 2023 कविताएँ समाजिक कर्म साधना से बड़ी कोई तपस्या नहीं, किसी पहाड़ की चोटी में सब कुछ त्याग कर तप और गृहस्थ में रहकर मन निर्मल रहे चित्त प्रसन्नता से भरी हो। 30302 0 Hindi :: हिंदी
किसी पहाड़ की चोटी- में सब कुछ त्याग कर तप गृहस्थ में- मन निर्मल रहे और, चित्त प्रसन्नता से भरी हो इस कर्म साधना- से बड़ी कोई तपस्या नहीं -मोती