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Shubhashini singh

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My Articles

चलो लम्हे चुराते है जो रेत सी हाथों से फिसलती जा रही आज उसको कैद करते है चलो लम्हे चुराते है थोड़ा सा लम्हे को जी लेते है उनसे कुछ ख्व� read more >>
ये दिल जैसे कभी मोम सा तो कभी पत्थर सा कभी टूटा सा तो कभी जुड़ा सा फिर भी ये हमारे आखरी सांस तक साथ दे जाती कभी मोम के जैसे पिघल जाती त� read more >>
उसूलों के सिक्के ये है हमारे पूर्वजों के सिक्के जिनके उसूलों पर आज हम चलते है वो है हमारे पूर्वजों के सिक्के वो हमारी संस्कृति हमार� read more >>
मां तुम्हारा ख्याल जैसे मां तुम्हारा ख्याल जैसे चहेरे की मुस्कान मां तुम्हारा ख्याल जैसे नीम की छाव मां तुम्हारा ख्याल जैसे वो तुम� read more >>
क्या जरूरी है आज के जमाने में क्या जरूरी है किसकी सुना जाए खुद की या दुनिया वालो की खुद की करू तो दुनियां धिक्कारे और दुनियां की सूनू read more >>
सारा सुकून छीन लिया एक औरत का सरा सुकून छीन लिया जो कभी एक काम ना करती आज दिन भर काम कर के भी ताने खाती जो मां बाप के घर लाडो से पली आज व� read more >>
विश्वास का फूल ये वो फूल है जो एक बार दिलो में खिल जाए तो सारी बगिया महक जाए विश्वास का फूल ये वो फूल है जो जल्दी किसी बगिया में ना खि� read more >>
भूल हो जाती है सबसे हां भूल हो जाती है सबसे किसी को पहचानने में किसी की नियत जानने में अक्सर हमारी आखे धोखा खा जाती है जब हम किसी पर भर� read more >>
ख़ामोशी वो जवाब है जिससे हर सवाल का, जवाब दिया जा सकता हैं। खामोशी वो जवाब है जिससे कुछ ना बोल कर भी, सब कुछ बयां किया जा सकता हैं। ज़ि� read more >>
ज़िन्दगी ने पकड़ रखी रफ़्तार मानो जैसे ट्रेन की हो ये रफ़्तार जिंदगी भी वही रुकेगी जहां इसकी मंजिल है ना ये पीछे जाएगी ना ही ये पीछ� read more >>
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