चलो आज उसकी कहानी सुनाता हूँ जिसे मैं प्यार से सखी बुलाता हूँ. आई थी मेरी जिंदगी में कुछ 5 साल पहले लगती थी दिखाने में मेरे बिना जो रह ले, � read more >>
आगे एक सार्वजनिक पेशाबखाना था, जहां से तेज बदबू आ रही थी । 10 कदम और आगे चलने पर 64 नंबर कोठे के ठीक सामने ‘चाय वाला’ की चाय की खानदानी दुका� read more >>
तराशना चाहा पर तराश ना पाये, हम मोहब्बत इस एहसास को चंद अल्फाजों में दाल ना पाये l
खैर गम नही हमे नाकाम होने का, जो इस ख्वाब को हम रेत के त read more >>