सुख -दुःख साथी जीवन का,खेल ये पुराना
आज गम है तो कल, खुशीयां भी तो होगी
हे अंधेरा जीवन में ,तो रोशनी भी होगी
रख ले तू हौसला ,फ़िर सवेरा ह� read more >>
सांझ ढले ,तो घर आना तुम,
कई उम्मीदों को, फ़िर लाना तुम।
छुट रहे ,उन रिस्तो की डोर को,
फ़िर मजबूती से, बंध जाना तुम।
साँझ ढले तो ,घर आना त� read more >>
गुजरे उस शाम की तलाश ना थी
जब सिर पापा की गोद में था
हमे लोगो की उम्मीद की चाह ना थी
जब एक उम्मीद पापा की थी
किसी के रूठने से फर्क ही ना � read more >>