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Jyoti yadav
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Jyoti yadav
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@ jyoti-yadav
, Uttar Pradesh
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घर मेरे राम आएं है-दिवाली हुईं मेरी
दिवाली हुईं मेरी घर मेरे राम आएं है सज गई अवध हमारी कलयुग में नया विहान लाए हैं मुबारक मुबारका मुबारका मुबारका प्रेम भाव जगाने ई�
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ए जिंदगी कभी तो तु मेरे आंसु पोंछने आया कर-हमें ना रूलाया कर
इतना ना सताया कर ए जिंदगी हमें ना रूलाया कर मेरे आंसु मुझे खुद ही पोंछना पड़ता है कभी तो तु मेरे आंसु पोंछने आया कर तेरे मेरी क्या दुश
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अब मयईहर आई हूं-कर कबुल दुआं तेरे शहर आईं हूं
कर कबुल दुआं तेरे शहर आईं हूं खोल नयन मां अब मयईहर आई हूं हाथ में पुजा के थाली लोटिया में जल भर लाईं हूं बोल न अम्बे। अब मयईहर आई हूं
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मैं रात अमावस की-चांद कहां होगा मेरी तकदीर में
मैं रात अमावस की चांद कहां होगा मेरी तकदीर में अंधेरों से रिश्ता मेरा रौशनी नहीं है मेरी नसीब में कभी कभार ख्वाबों में पूनम नजारा द�
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मै परिंदा बेखबर-ऐसी ख्वाहिश ए तमन्ना है
मै परिंदा बेखबर उङू उम्र भर ऐसी ख्वाहिश ए तमन्ना है दुर हो गम दर्द सारे ना हो फिक्र कोई हस्ते मुस्कुराते हुए जीना है खिला खिला गुलश�
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यह शिशु बड़ा प्यारा है-हो सके तो इसे थाम लो
यह शिशु बड़ा प्यारा है हो सके तो इसे थाम लो राजमहलों का राजदुलारा है हो सके तो इसे थाम लो अब तक बिठाया था अपने गोद में इसे पहली बार उता�
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ब्रह्माण्ड भव्य है और बहुत भव्य निःसंकोच मित्रता
ब्रह्माण्ड भव्य है और बहुत भव्य इससे मित्रता की जा सकती है निःसंकोच बस जरूरत है दुर रहे हम नकारात्मक विचारों से और विकसित करे सकारात�
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बेटी का खत पिता के नाम ले जा-ऐ हवाएं इक पयाम ले जा
ऐ हवाएं इक पयाम ले जा बेटी का खत पिता के नाम ले जा इस शुभ दिन का शुभ पंचाग ले जा पुछ आना खैरियत मेरे पापा ♥️ की देने के लिए उन्हें मेरे च�
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पाकिजा आई जहन्नुम के बाजार में
इक नन्ही परी बादल जिसका आशियाना हुआ करता था आफताब सी चमक माहताब नजराना हुआ़ करता था हर दर्द गम से बेफिकर मस्त मौला मुस्कुराना हुआ़ �
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जाऊं कहां मां कुछ तो बता दे
रास्ते है अजनबी अनजान ये शहर जाऊं कहां मां कुछ तो बता दे मेरे ख्वाबों की दुनिया को अब हकीकत से सजा दे जाऊं कहां मां कुछ तो बता दे जज्�
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