मैदान ए शायरी का एक प्यादा हूँ मैं,
. इस महदूद सल्तनत का वजीर नहीं हूँ
ग़ज़ल के नाम पे बस हाल ए दिल बयां करूँ,
. मैं बद्र , गालिब , या मीर नहीं ह read more >>
मैं आदमी असरदार हूं
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मुझको नहीं फिकर कोई
न जीत की न हार की
बस एक ही डगर चला
सेवा समर्पण प्यार की
छल छिद्र कपट से परे
मुश्किलों � read more >>
झर-झर बरसे नयन हमारे ज्यूँ झर-झर बदरा बरसे रे
पिया मिलन को आतुर अंखियाँ, हाय रे ! कब से तरसे रे
दरद जिया का सह नहिं जाए, सुध बुध तन बिसराई
� read more >>