हूँ ज्ञान का सागर मै!
तुझे श्रेष्ठ कैसे मान लूँ!!
हूँ गलत लाख मै फिर भी!
अपनी गलती कैसे मान लूँ!!
हैं तजुर्बे मेरी उम्र जि� read more >>
है शाम का रंग!
है श्याम का रंग!!
दिल का मेरा प्यारा!
मेरा अपना काला रंग!!
नकारता सभी की सत्ता को!
विमुखता को व्यक्त ये करता है!!
प्र read more >>
एहसास ये कुछ जुदा सा है!
एक तरफा ही सही मगर प्यार सा है!!
पाने की तुझे चाह मेरी बस ये ही ख्याल है!
क्या बताऊँ अब तुझे अज़ीब सा मेरा हाल ह read more >>
सभी पाठकों से अनुरोध है यह कहानी मेरी कल्पना पर आधारित है इसका किसी भी व्यक्ति विशेष से कोई भी संबंध नहीं हैं अतः इ� read more >>