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Akhilesh Umrao 'Akhi'

Akhilesh Umrao 'Akhi'

Akhilesh Umrao 'Akhi'

@ akhalsha-umarava
, Uttar Pradesh

अखिलेश उमराव 'अखि' एक प्रतिभाशाली कवि हैं जिन्होंने अपने सादगीपूर्ण और भावनात्मक लेखन से पाठकों के दिलों में विशेष स्थान बनाया है। उनका जन्म 2004 में उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के पतारी गांव में हुआ था। उन्होंने प्रो. राजेंद्र सिंह (राजू भैया) विश्वविद्यालय, प्रयागराज से बीएससी की डिग्री प्राप्त की है और डिप्लोमा इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग, उत्तर प्रदेश बोर्ड ऑफ टेक्निकल एजुकेशन, लखनऊ से किया है। वर्तमान में वे एमएससी की पढ़ाई उसी विश्वविद्यालय से कर रहे हैं। अखिलेश 'अखि' की कविताएं जीवन की सच्चाइयों और मूल्यों को दर्शाती हैं। उनकी रचनाओं में प्रेम, जीवन-संघर्ष, सामाजिक यथार्थ और आध्यात्मिक विचारधारा जैसे विविध विषय समाहित होते हैं। उनकी लेखनी की विशेषता है सरल भाषा, स्पष्टता और भावों की सजीवता। उनकी प्रमुख रचनाएं हैं: 1. किसे पता है? 2. अनोखी विजय 3. हंसते हुए जीना 4. जिंदगी की उड़ान 5. सुखद जिंदगी 6. ए जिंदगी 7. सादगी का जीवन 8. कृष्ण की कृपा 9. बजरंगी दर्शन 10. दिल की बातें 11. देश का भविष्य 12 कष्ट दिल में छिपा अखिलेश जी ने दोहा, चौपाई, सोरठा, गीत और मुक्त छंदों का कुशलतापूर्वक प्रयोग किया है। उनकी कविताएं पाठकों को केवल पढ़ने का ही नहीं, अनुभव करने का भी अवसर देती हैं। अखिलेश उमराव 'अखि' की कविताएं सादगी, सत्य और संवेदना का अद्भुत समन्वय हैं और हिंदी काव्यजगत में एक युवा प्रेरणा के रूप में उभर रहे हैं।

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न इश्क करो झूठा, न प्यार करो फर्जी, मेरी शायरी मेरी मर्जी।। read more >>
ऐ जिंदगी तू ऐसे हालत न बना, कि पसंदीदा शख्स ही खोना पड़े !! अपना प्यार हो या फिर दोस्ती, एक सीमा 😔 बाद खुद ही छोड़ दे ✍️ अखिलेश उमराव 'अ read more >>
उदासी पकड़ ही नहीं पाते लोग , इतना संभल कर मुस्कुराते है हम ..! ✍️ अखिलेश उमराव 'अखि ' B.Sc.,MSc & Engineering Patari Alampur fatehpur uttar pradesh read more >>
सुना है कानपुर में बारिश बहुत है... गलती से भींग मत जाना यार। यदि तेरी गलतफहमियां धूल गई ... तो तुझे याद हम फिर बहुत आयेगे !! ✍️ अखिलेश उमर read more >>
कुर्मी समाज की धरोहर, हमारी संस्कृति है हमारी शक्ति। हमारी परंपराएं हैं हमारी पहचान, हम इन्हें संजोते हैं और आगे बढ़ाते हैं। हम हैं read more >>
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हम अधूरे लोग हैं 'अखि '...... न नींद पूरी हुई, न ख्वाब पूरे हुए !! read more >>
तुम एक कप चाय पिलाने को कहो तो सही ... 'अखि' फुर्सत निकाल कर आयेगा जरूर !! read more >>
नए सपने, नए लक्ष्य और नए रास्ते... सब खुलते डिप्लोमा कॉलेज के रास्ते। ज्ञान की बौछार, कॉलेज की दीवारें... डिप्लोमा की राह में चलता है 'अख� read more >>
*कष्ट दिल में छिपा* कष्ट दिल में छिपा है, दर्द आंखों में जमा है...। कष्ट की अनकही कहानी है, जो कि शब्दों में न बयां है...। कष्ट दिल में इतन� read more >>
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