ना जाने इंसान कितने किरदार निभाते हैं
वफा का बात कर ,
पीछे से वार करते हैं ..!!
ना जाने इंसान कितने किरदार निभाते हैं ..!!!
चेहरे एक , रंग उस read more >>
खामोशियों, भाग 001 😁
शकुंतला घर से बाहर निकलने ही वाली थी कि जोरों की बारिश शुरू हो गई, हवा जोरों से चल रही थी बादलों की गरजने की आवाजें � read more >>
सूरज की पहली रोशनी,
जब आती सीधी ..!
दिखाई देते,
मेरे घर के, सामने वाली खिड़की .!!
उस खिड़की से, अंगराई लेती हुई
बंद आंखें की हुई, सामने नजर आ� read more >>
गुस्ताख़ मोहब्बत ( भाग - 003)
________
गांव में पंचायत बैठी हम दोनों को बुलाया गया। गांव के सारे पुरुष बच्चे हम दोनों को घेरकर ऐसे देख रहे थे , म� read more >>
गुस्ताख़ मोहब्बत ( भाग - 002 )
_________________😞
वो अक्सर मेरे घर आ जाया करती थी और मैं उसके आने का बेसब्री से इंतजार करता। सबसे नजरें बचाकर मैं उसे � read more >>
गुस्ताख़ मोहब्बत ( भाग- 001)
__________
यह कहानी वास्तविकता को छूती हुई एक काल्पनिक कहानी है। जो महज एक लेखक के दिमाग में उपजे हुए बीज से उत्पन् read more >>
रहस्य जंगल का किसी को मालूम नहीं..!
निकलना मुश्किल पड़ जाए ,
गुम हो जाए अगर कहीं...!!
रहस्य जंगल का किसी को मालूम नहीं..!
खतरनाक जानवरों से � read more >>
मौसम के मिजाज,
आज कुछ बदले बदले से लगते हैं...!!
जहां धूप की तपिश थी,
हर जगह छांव ही छांव दिखते हैं...!!!!
अजय आनंद सुल्तानगंज भागलपुर बिहार read more >>
तुम मेरी होती ,
सोचते हैं हम कभी...!!
बहते हुए तेरे नैनों से अश्रु,
पोंछ कर दे पाता , तुझे हम खुशी..!!!
अजय आनंद, सुल्तानगंज, भागलपुर, बिहार read more >>