एक मूरख नारी को कब,ना जाने किसने। लपेटा था।
ज्ञात हुआ तब लोगों को, जब जना नारी ने बेटा था।
कहने को वह मूरख थी, पर पुत्र प्रेम की क्षमता थी read more >>
मैं अभी पुल पार कर ही रही थी कि सचखंड ट्रेन स्टेशन पर आ गयी ,मैं और तेज तेज भागने लगी ,मेरी साँस बुरी तरह फूलने लगी | मेरे भाई ने टोका “जल� read more >>