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सभ्यता की पहचान
भारत में रहने वाले भारत की सभ्यता हम जाने,जब कोई आ जाये घर पर मेहमान , उसका सत्कार करना इंडिया जाने।जो करें मेहमानों का तिरस्कार वो ह�
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//... कैसे हो भैया ...//
//... कैसे हो भैया ...// क्या पुराना और क्या नया है भैया...? वैसे , ऐसे और कैसे हो भैया...? वही देते , वही बटोरतें...! वही चोर हैं और वही लुटेरे...! क�
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लोग कहते हैं सैकड़ो मुल्क हैं तुम्हारे
लोग कहते हैं कि सैकड़ों मुल्क हैं तुम्हारे लेकिन फिर भी फिरते हो दर दर मारे कभी बर्मा कभी काबुल कभी फिलीस्तीन कभी यमन से भगाए जाते ह�
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वक़्त का पहिया
वक़्त का पहिया कारवाँ गुजर जाते हैं खंडहर शेष रह जाते हैं बेपनाह दर्द लिये अपनी जुबानी अपनी कहानी कह जाते हैं नितांत अकेलापन �
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सबसे प्रेम से बोलो
सबसे प्रेम से बोलो, किसी को बुरा मत कहो, सबसे अच्छा व्यवहार करो, किसी का तिरस्कार ना करो।
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अंधापन इश्क का
"अंधापन इश्क का" उछाली जा रही पिता की पगड़ी फीकी पड़ रही भाईयो की मूछें जिम्मेदारी की एक पूरी मंडली कर रही तु�
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पुश का एक दिन
पूष का एक दिन (भाग-1) ठंड का दिन था बादल कुछ दिख रहे कुछ छिपे हुए थे खिलखिलाती धूप दिख रही थी । राजू खेत में काम करने गया था घर में उस�
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जश्न ए सफलता
"जश्न ए सफलता" अभी कहा मंजिल है अभी मीलो चलना बाकी है मंजिल का रास्ता आसान नहीं अभी खुद में कुछ परिवर्�
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क्योंकि वो अनमोल होते हैं
मैं नही चाहता कि मुझे भीख मे दी जाऐ चंद बीघा जमीन और बदले मे छीन लिये जायें मुझसे मेरे जंगल मैं नही चाहता तितर बितर कर दिया जाये मेरा �
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ज़िम्मेदारीयों का बोझ
ज़िम्मेदारियों का बोझ कंधा तोड़ देता है कम उम्र में बाप गर दुनिया छोड़ देता है — त्रिशिका श्रीवास्तव ‘धरा’
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साल २०२२
साहित्य लाइव एवं साहित्य लाइव के सभी पाठकों एवं लेखकों को मेरी ओर से नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं... आप सभी का यह साल बहुत ही खुशियों भ�
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नए साल की हार्दिक शुभकामनाएं
किसी को न छुए गम इस बरस, सब खुश रहे अपनों के साथ, सुख बरसे आपकी जिंदगी में, आपकी मुस्कुराहट हंसी के साथ।
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