पता नही वो खुद में कौन सा राज लिए बैठे है ।
हमारे हर जख्मो का इलाज लिए रहते है।
खुद से जुदा भी वहि करते है ।,और फिर मना लेते है
हम जानते ह� read more >>
की बेहत दिन हो गये, कूच लिखा नहीं है!
लिखने के लिये तूमसा कोई मिला नही है!
और पकड लू कलम हातो मे अपणी तो,
शब्द नहीं यार तुम्हारी तस्वीर नि� read more >>
गीत- आ कहीं ओर चलें।
रचना- जितेन्द्र शर्मा
कोई तुझको ना चुरा ले, आ कहीं ओर चले।
कोई वापस ना बुला ले, आ कही ओर चले।
चांद तारों से परे भी, त� read more >>