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बचपन ही अच्छा था, हम बच्चे ही अच्छे थे। झूठ, फरेब ,नफरत से दूर थे हम, मन के हम सच्चे थे।। read more >>
साहिल और आर्यन बचपन से ही सबसे अच्छे दोस्त थे। दोनों एक ही स्कूल में पढ़े, एक साथ खेलते, हँसते और अपने हर सपने एक-दूसरे से साझा करते थे। read more >>
आयान हमेशा सोचता था कि उसके पापा उससे ज़्यादा सख़्त हैं। सुबह जल्दी उठाना… समय पर पढ़ाई करना… दोस्तों के साथ देर तक बाहर ना रहने देन� read more >>
यूसुफ और अलीज़ा अक्सर अपने कमरे में बैठकर बातें करते थे। “काश हम मम्मी-पापा के समय में पैदा होते…” अलीज़ा ने मोबाइल स्क्रीन देखते हु read more >>
That winter morning was colder than usual. Sahil quietly tied the laces of his old blue shoes. The sides were slightly torn, and the color had faded, but they were the only shoes he had. His mother had stitched them twice already. “Take care of them,” she would always say gently. “We’ll buy new ones when we can.” On his way to sc read more >>
उस रात अस्पताल की दीवारें भी जैसे चुप थीं। हल्की-हल्की बारिश हो रही थी। बारह साल का अयान अपनी माँ का हाथ पकड़े ऑपरेशन थिएटर के बाहर बैठ� read more >>
तपती दुपहरी और तेज धूप, छोटा सा आसियान मेरा भी है। आप के आराम के वक्त, मैं भी आई थी। तपती दुपहरी में सो रहे थे आप, मैं मुंडेर से पुकार कर read more >>
अल्फाजो का नया दौर आया है, तुम पर क्या लिखूँ ऐसा ही नया खरीददार आया है।। read more >>
धूप घाम में यह छाता है, रोने लगे तो रूमाल। मां का आंचल अवर्णित है, यही मां का कमाल।। नींद आयी तकिया बनकर, बेटे को सुलाया। मां ने आकर आं� read more >>
सर्द हवाओं के नाम सर्द हवाएँ जब चलती हैं, तो सिर्फ़ जिस्म नहीं काँपता— यादें भी सिहर उठती हैं। बढ़ती ठंड धीरे-धीरे वक़्त की रफ़्तार � read more >>
*वो छोटा सा मेरा गाँव-2* वो छोटा सा मेरा गाँव, जहाँ भोर हमें जगाती थी, चिड़ियों की मीठी आवाज़ मन को रोज़ सहलाती थी। कच्ची पगडंडियों पर � read more >>
नन्हेसे आँखो मे है एक सपना जमी पर छोटासा घर बनायेंगे अपना । आओ मिट्टी से बनाये घर गुड्डी -गुडे का खेल खेलेंगे हम । बचपन की हमारी � read more >>
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