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कविता -मेरा बचपन मेरे बचपन का वह एक जमाना था ना दुख का ना गम का बस खुशियों का खजाना था। दिन भर के भाग दौड़ में ना जाने किसकी चाहत में read more >>
कविता -मेरे दर्पण हिय का मेरे दर्पण हो तुम अर्पण और समर्पण हो तुम। अंदर से तुम बाहर से तुम मन का मेरे तर्पण हो तुम हिय का मेरे दर्प� read more >>
★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★ *प्रेरक कहानी* 💐*🌝मक्खीचूस गीदड🌝*💐 👌प्रस्तुतकर्ता-सपनों का सौदागर......करण सिंह👌 ★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★ 👏 ज� read more >>
क्या वह भी दिन थे। बचपन था या स्वर्लोक धूप में खेले धूल में खेले मां बाप के गोद में खेले खेले साथियों के साथ में क्या वह भी दिन थे। मां read more >>
ऐ रिश्ते कई नाम पर हमें उलझा के रख देती है पर ये जिंदगी है कि हमें बस रुलाती ही रहती है। धन्यवाद read more >>
👉 *इस ढोंग से क्या फायदा?* *माथे पर चन्दन पोतने से क्या फायदा? जब कि मन में बुराइयों के ढेर जमा हो रहे हैं। बाहरी बनावट से कुछ काम न सरेगा � read more >>
कभी इंसान इतना अच्छा होता है कि लोग उसका इस्तेमाल करते हैं 😔😭💯💔 read more >>
नसीब - नसीब की बात है किसी के हिस्से में दुःख तो किसी के नसीब में सुख पर सबका नसीब एक ही कलम से लिखा जाता है वो है ईश्वर की कलम। धन्यवाद read more >>
कभी - कभी कोई सब्जी इतनी कड़वी होती है कि उसमें जितनी भी मिठास भर दो पर वो मीठी नहीं हो सकती बिल्कुल ऐसे ही कुछ रिश्ते में दूरी बड़ जाए फ� read more >>
तर्ज़=> बंसी बजी हो मधुवन मे,जो जिया नैया मोरे बस मे लल्ला जन्म लये हो आँगन मे,देखे बिना जी नैया बस में बस मे हतो री,अब नैया मोरे बस मे� read more >>
इस कविता के माध्यम से पिता की मेहनत और उस मेहनत से परिवार ओर बच्चों की उम्मीद का एक वाकया लिखने की कोशिश कर रहा हूँ। की किस तरह एक पिता द read more >>
बगैर आब के मछली की तड़प आब क्या समझे। डाल से टूटे पत्ते की तड़प डाल क्या समझे। जो किसी गैर की मुहब्बत में अपनों को भुला दे। वह मेरे दिल � read more >>
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