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जो सुकून दे बेफिक्र हैं इस लिए दर्पण सा वेहबार रखते हैं फ़िक्र वो करे जो चेहरे दो चार रखते हैं! जो सुकून दे मन को वो काम करते हैं डरे � read more >>
कविता- लोकतन्त्र बचायेगा कौन? अरे लोकतंत्र के झण्डा बरदारों, चतुर लोमड़ियो और रंगे सियारों। अब अपनी मनोरंजक बातों पर अड़ेगा कोन? भर� read more >>
सोने दरबार का नजारा ले लिया दाती तेरे नाम का सहारा ले लिया 🌹🌹 गोरा रूप में बैठी मैया बन शिव की पटरानी मां कमल नैन मुखड़े पर चंदा तीन ल� read more >>
कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है ! मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है !! मैं तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है ! ये तेरा दिल � read more >>
(व्यंग्यात्मक रचना) शीर्षक - मैं नहीं लिख सकता:कविता आज फादर्स डे है जिसे हम पित्र दिवस के नाम से जानते हैं, अभी कुछ सप्ताह पहले ही मदर� read more >>
रोते हैं वो जो कभी! साथ  मे हंसते थे!! हाँथ थाम कर चलते थे साथ! वो अब वीरान घूमते है!! कुछ सवाल उसके थे! जिसका जवाब मेरी खामोशी थी!! read more >>
मैं ना धुंध हूँ ना राख हूँ, जिंदगी है मौत से मैं मौत के ही पास हूँ ll राज से द्रोह है , और दंश से मोह है , कंटको के बीच हूँ मैं कंटको का लोभ ह read more >>
वो शिक्षक ही तो हैं, कभी डांट इसने प्यार जताया, कभी रोक - टोक कर चलना सिखाया। कभी काली स्लेट पर चाक से, उज्ज्वल भविष्य का सूरज उगाया। हा� read more >>
माँ तेरे आँचल की छाँव में माँ में चलता-फिरता खेलता कब पैरों पर स्थित हुआ माँ तेरे ममता की छाँव में माँ मुझे हर पल तेरी गोदी याद आती है � read more >>
रोती छत-सिसकता फर्श उस घर की टपकती छत ने, घर के फर्श से कहा होगा- कि माफ़ करना, हालत अभी बुरी है। घर के गीले फर्श ने, हँसते हूए कह दिया हो read more >>
सुनहरे पल जो गुजर गये हैं, उनकी यादें संजो रहा हूं। आंखों की आदत है भीग जाना, मत समझना के रो रहा हूं। कमल नयन थी जो आंखे, जाने कैसे यूं तन read more >>
हम यार है सच्चे यारो के। दिलदार है सच्चे दिलों के। read more >>
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