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जालिम दुनिया
जालिमो की दुनिया में, इंसान भी जालिम हुए। इस दुनिया में घमंडी शराबी, इंसान भी जालिम हुए। यह दुनिया कितनी जालिम है, यहाँ राज छुपाना प�
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भक्ति
प्रभु की तो भक्ति ही, जीवन का सार हैं।भक्ति बिना ही ये तो, दुनिया बेकार हैं।दुनिया में रहोगे तो, भक्ति से ही मान हैं। भक्ति बिना ही तो, �
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जीवन जीने की कला
शीर्षक---जीवन जीने की कला जीवन, चाहे जैसा हो जीवन जीने की एक कला सीखना चाहे रास्ते हो कितने भी संघर्ष भरे उस पर चलने की एक कला सीखना
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ती
कॉलेज चा पहिला दिवस मन घाबरत होते डोके मात्र वेगवेगळ्या विचाराने साचले होते कॉलेज मध्ये पाय ठेवता क्षणी तिचा चेहरा दिसला
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जिथे मन भयरहित असते.........
जिथे मन भयरहित असते आणि जिथे ज्ञान मुक्त असते तिथे डोके उंच असते. अरुंद घरगुती भिंतींमुळे जगाचे तुकडे झालेले नाहीत, हे सत्यातून आलेल�
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रंग बिरंगी तितली
तुम्हें उड़ता फूलों पे देख उर में उठते प्रशन अनेक फूलों के कानों में कुछ कह जाती हो या फिर प्यार भरा चुंबन उनको दे जाती हो फिर झूम उठत
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दोहा :-
दोहा :- मन घुवत कतैहि जैहे,काल हट पछताहे! माया अन्त ईश्वर की, सद कर्म फल खाये !! व्याख्या:- सांसारिकता जीवन मैं मनुष्य का मन बार-बा
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सपनों की लाली....
सपनों की लाली ! आंखें चार हुई थी, मुलाकात खूब हुई थी- जो जुबान से कह ना पाए, सोचा था- एक लाल गुलाब दूंगा लाल बाग से चुन लाऊंगा, भेंट करूं
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कविता = खादी
⭐ कविता = ( खादी ) एक खुदा के हम सारे बंदे ! धर्म की आड़ में खुल गए धंधे !! खेल रहे हैं खेल यह गंदे ! अवाम में हो गए सारे नंगे !! कुर्बानियों से �
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पीयू-पीयू बोले दिल ये पपीहा....
पीयू-पीयू बोले दिल ये पपीहा नदिया के तीरे बंसी जो बोले, पीयू-पीयू दिल ये पुकारे आओ सखी- हम देखन को चलें, बंसी बजैया मोरे पिया- कृष्ण म�
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सखी रे कोयलिया गाती तो होगी....
सखी रे चल रे चल ! कोयलिया- गाती तो होगी, फाग सुनाती तो होगी। फागुन की- मस्त बयारों में बहकते गाते, सखी रे चल रे चल। नदिया के पार- आम की �
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नारी
नारी है दुनिया की धरनी, नारी ही तो जग की जननी। नारी है तो दुनिया होगी, नारी बिन दुनिया न होगी। नारी का न करो अपमान, नारी से ही दुनिया महा
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