(दोहा छंद)
समय समय का फेर था, गए वनवास राम।
रावण का वध थे किए,अमर हुआ तब नाम।।
समय समय का फेर था, सत्य गया था हार।
भरी सभा में द्रौपदी, करी read more >>
दिल बहुत कुछ बोलना चाहता है,
मगर जुबान चुप रहती है,
मन उदास सा यूं रहता है,
एक आस सी टूटी लगती है,
कोई आए समझा जाए ना,
मेरे दिल को बहला जाए � read more >>
गलतियां होती है इंसान से
हर वक्त नाराज ना होना
तकलीफ होती है दिल को
थोड़ा सा तुम मुस्कुराना...
आओ चलो जीते है
नया दिन नए से...
इतना रूठ के read more >>
मैं हर रात तोड़ता हूँ रिश्ता तुझसे,
मुझे हर सुबह तेरी हसरत हो जाती है,
तू ही बता मैं तुझे सामने बिठा कर तुझसे कैसे लडूं??
मैं जब जब तेरी आ� read more >>