तेरे श्रंगारों में मैं ही तो बसता हूं,
तेरी हर अदाओं का मैं ही तो दिवाना हूं।
और कोई चेहरा ना पहचानु,
तूं ही तूं चारों तरफ_
तूं ही तूं चा� read more >>
न मैं कवि हूं ,न मैं कहानी _कार हूं ,
न गज़ल का दीवाना न गजल कार हूं ,
पर होने को सब कुछ हूं
उसी की मर्जी से__
जिस परवरदिगार का जन्मों से सेव� read more >>
तू चली गई तो मेरे चेहरे की मुस्कराहटें चली गई ,
जो हंसने पे हो जातीं थी वह चेहरे की बनाबटें चली गईं ,
तेरी वजह से को आ रही थीं जो रूकावटें � read more >>