Manju Bala 09 Jul 2023 आलेख समाजिक औरत तेरी यही कहानी आंचल में दूध आंख में पानीऔरत तेरी यही कहानी आंचल में दूध आंख में पानी< सदियों से ही औरतों को क्यों अग्नि परीक्षा देनी पड़ती है औरत होना कोई पाप तो नहीं हर सदी में हर युग में औरतों को ही अग्निपरीक्षा क्यों देनी पड़ती है क्यों उसे हमेशा पराया समझा जाता है जिस पिता के घर वह पलती है उसे वह कभी भी मरते दम तक पराया नहीं समझती और शादी होते ही उसे एक पल में पराया कर दिया जाता है वह हर पल अपनों के लिए जीती है और अपनों को और बेहतर जिंदगी देने के लिए सोचती है अपने लिए तो वह कभी जीती ही नहीं उसकी आंखों में सपने अपने लिए होते ही नहीं वह तो कभी पिता के सपनों को पूरा करने के लिए उच्च पद प्राप्त करने के लिए मेहनत करती है तो कभी भाई के लिए कुछ बेहतर करने के लिए सपने देखती है तो कभी ससुराल में अपनों के लिए बहुत बहुत कुछ करना चाहती है औरतों की ही देखा गया है औरत ही औरत की दुश्मन है औरत ही औरत को आगे नहीं बढ़ने देती हर मुकाम पर औरत औरत को नीचा दिखाने की कोशिश करती है समाज में हर मर्द भी खराब नहीं होता अच्छे से भी यह दुनिया भरी पड़ी है औरत और मर्द किसी भी गाड़ी के दो पहिए हैं जो इस संसार को चलाने के लिए जरूरी हैं दोनों एक दूसरे के पूरक हैं औरत कोई भोग की वस्तु ने उसकी भी कुछ इच्छाएं हैं कुछ सपने हैं कुछ तमन्ना है हैं तो हमें क्यों ना हर औरत का सम्मान करना चाहिए अपने बच्चों को ऐसे संस्कार दें कि वह हर औरत का सम्मान कर सके यह ना हो कि वह यह समझ ही ना सके कि औरत कोई वस्तु है या एक जीवित चीज है जिसकी भी इच्छाएं हैं आकांक्षाएं हैं और बहुत कुछ है अपनों से अपनों के लिए चाहती है वह कोई भोग की वस्तु नहीं वह एक सादगी से जिंदगी जीना चाहती है और बहुत कुछ अपनों के लिए करना चाहती है और अपना आप अपना तन मन धन सब अपनों के लिए कुर्बान कर सकती है ऐसी ताकत एक शक्ति एक नारी में ही हो सकती है तो नारी को तो हमेशा ही शक्ति का रूप कहा जाता है शक्ति यानी कि नारी शक्ति की जब सारे संसार पूजा करता है तो क्यों उसे भोग की वस्तु समझा जाता है क्यों उसे एक वस्तु समझा जाता है वस्तु नहीं है नारी नारी है शक्ति थैंक यू धन्यवाद 44907 8 5 Hindi :: हिंदी
औरत तेरी यही कहानी आंचल में दूध आंख में पानी< सदियों से ही औरतों को क्यों अग्नि परीक्षा देनी पड़ती है औरत होना कोई पाप तो नहीं हर सदी में हर युग में औरतों को ही अग्निपरीक्षा क्यों देनी पड़ती है क्यों उसे हमेशा पराया समझा जाता है जिस पिता के घर वह पलती है उसे वह कभी भी मरते दम तक पराया नहीं समझती और शादी होते ही उसे एक पल में पराया कर दिया जाता है वह हर पल अपनों के लिए जीती है और अपनों को और बेहतर जिंदगी देने के लिए सोचती है अपने लिए तो वह कभी जीती ही नहीं उसकी आंखों में सपने अपने लिए होते ही नहीं वह तो कभी पिता के सपनों को पूरा करने के लिए उच्च पद प्राप्त करने के लिए मेहनत करती है तो कभी भाई के लिए कुछ बेहतर करने के लिए सपने देखती है तो कभी ससुराल में अपनों के लिए बहुत बहुत कुछ करना चाहती है औरतों की ही देखा गया है औरत ही औरत की दुश्मन है औरत ही औरत को आगे नहीं बढ़ने देती हर मुकाम पर औरत औरत को नीचा दिखाने की कोशिश करती है समाज में हर मर्द भी खराब नहीं होता अच्छे से भी यह दुनिया भरी पड़ी है औरत और मर्द किसी भी गाड़ी के दो पहिए हैं जो इस संसार को चलाने के लिए जरूरी हैं दोनों एक दूसरे के पूरक हैं औरत कोई भोग की वस्तु ने उसकी भी कुछ इच्छाएं हैं कुछ सपने हैं कुछ तमन्ना है हैं तो हमें क्यों ना हर औरत का सम्मान करना चाहिए अपने बच्चों को ऐसे संस्कार दें कि वह हर औरत का सम्मान कर सके यह ना हो कि वह यह समझ ही ना सके कि औरत कोई वस्तु है या एक जीवित चीज है जिसकी भी इच्छाएं हैं आकांक्षाएं हैं और बहुत कुछ है अपनों से अपनों के लिए चाहती है वह कोई भोग की वस्तु नहीं वह एक सादगी से जिंदगी जीना चाहती है और बहुत कुछ अपनों के लिए करना चाहती है और अपना आप अपना तन मन धन सब अपनों के लिए कुर्बान कर सकती है ऐसी ताकत एक शक्ति एक नारी में ही हो सकती है तो नारी को तो हमेशा ही शक्ति का रूप कहा जाता है शक्ति यानी कि नारी शक्ति की जब सारे संसार पूजा करता है तो क्यों उसे भोग की वस्तु समझा जाता है क्यों उसे एक वस्तु समझा जाता है वस्तु नहीं है नारी नारी है शक्ति थैंक यू धन्यवाद
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I have done M.A in three subjects these are Hindi ,History ,Political science. I have also done M.Ed...