मेरा दिल हर सितम सह लेता है जमाने का
न जाने क्यों ?
एक तुम्हारे सितम से दूर जाने
को जी चाहता है !
यह दिल है कि जमाने के दिए
कई गम दुनिया � read more >>
(मुक्तक छंद)
एक दौड़ था जब गम का मतलब भी नहीं था पता।
हर गम तकलीफ़ खुशियों का ही है लगता था पता।
कर्तव्यों के बेड़ी तले अब कटते हैं दिन र� read more >>